वाल्मीकि रामायण 4.16.12
ततः स्वस्त्ययनम् कृत्वा मंत्रवित् विजय एषिणी ।अंतःपुरम् सह स्त्रीभिः प्रविष्टा शोक मोहिता॥
tataḥ svastyayanam kṛtvā maṃtravit vijaya eṣiṇī |aṃtaḥpuram saha strībhiḥ praviṣṭā śoka mohitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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