वाल्मीकि रामायण 4.16.17
स वाली गाढ संवीतो मुष्टिम् उद्यम्य वीर्यवान् ।सुग्रीवम् एव अभिमुखो ययौ योद्धुम् कृत क्षणः॥
sa vālī gāḍha saṃvīto muṣṭim udyamya vīryavān |sugrīvam eva abhimukho yayau yoddhum kṛta kṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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