वाल्मीकि रामायण 4.16.18
श्लिष्टम् मुष्टिम् समुद्यम्य संरब्धतरम् आगतः ।सुग्रीवो अपि समुद्दिश्य वालिनम् हेम मालिनम्॥
śliṣṭam muṣṭim samudyamya saṃrabdhataram āgataḥ |sugrīvo api samuddiśya vālinam hema mālinam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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