वाल्मीकि रामायण 4.16.27
सूर्य पुत्रो महावीर्यः सुग्रीवः परिहीयत ।वालिना भग्न दर्पः तु सुग्रीवो मन्द विक्रमः॥
sūrya putro mahāvīryaḥ sugrīvaḥ parihīyata |vālinā bhagna darpaḥ tu sugrīvo manda vikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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