वाल्मीकि रामायण 4.16.3
अधर्षितानाम् शूराणाम् समरेषु अनिवर्तिनाम् ।धर्षणाम् अर्षणम् भीरु मरणात् अतिरिच्यते॥
adharṣitānām śūrāṇām samareṣu anivartinām |dharṣaṇām arṣaṇam bhīru maraṇāt atiricyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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