वाल्मीकि रामायण 4.16.33
ततो धनुषि संधाय शरम् आशी विष उपमम् ।पूरयामास तत् चापम् काल चक्रम् इव अन्तकः॥
tato dhanuṣi saṃdhāya śaram āśī viṣa upamam |pūrayāmāsa tat cāpam kāla cakram iva antakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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