वाल्मीकि रामायण 4.18.15
सूक्ष्मः परम दुर्ज्ञेयः सताम् धर्मः प्लवंगम ।हृदिस्थः सर्व भूतानाम् आत्मा वेद शुभाशुभम्॥
sūkṣmaḥ parama durjñeyaḥ satām dharmaḥ plavaṃgama |hṛdisthaḥ sarva bhūtānām ātmā veda śubhāśubham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें