वाल्मीकि रामायण 4.18.17
अहम् तु व्यक्तताम् अस्य वचनस्य ब्रवीमि ते ।न हि माम् केवलम् रोषात् त्वम् विगर्हितुम् अर्हसि॥
aham tu vyaktatām asya vacanasya bravīmi te |na hi mām kevalam roṣāt tvam vigarhitum arhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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