वाल्मीकि रामायण 4.18.36
श्रुणु च अपि अपरम् भूयः कारणम् हरिपुंगव ।तत् श्रुत्वा हि महत् वीर न मन्युम् कर्तुम् अर्हसि॥
śruṇu ca api aparam bhūyaḥ kāraṇam haripuṃgava |tat śrutvā hi mahat vīra na manyum kartum arhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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