वाल्मीकि रामायण 4.18.63
त्यज शोकम् च मोहम् च भयम् च हृदये स्थितम् ।त्वया विधानम् हर्यग्र्य न शक्यम् अतिवर्तितुम्॥
tyaja śokam ca moham ca bhayam ca hṛdaye sthitam |tvayā vidhānam haryagrya na śakyam ativartitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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