वाल्मीकि रामायण 4.18.7
ताम् पालयति धर्मात्मा भरतः सत्यवान् ऋजुः ।धर्म काम अर्थ तत्त्वज्ञो निग्रह अनुग्रहे रतः॥
tām pālayati dharmātmā bharataḥ satyavān ṛjuḥ |dharma kāma artha tattvajño nigraha anugrahe rataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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