वाल्मीकि रामायण 4.19.10
कपि पत्न्या वचः श्रुत्वा कपयः काम रूपिणः ।प्राप्त कालम् अविश्लिष्टम् ऊचुर् वचनम् अंगनाम्॥
kapi patnyā vacaḥ śrutvā kapayaḥ kāma rūpiṇaḥ |prāpta kālam aviśliṣṭam ūcur vacanam aṃganām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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