वाल्मीकि रामायण 4.19.19
पाद मूलम् गमिष्यामि तस्य एव अहम् महात्मनः ।यो असौ राम प्रयुक्तेन शरेण विनिपातितः॥
pāda mūlam gamiṣyāmi tasya eva aham mahātmanaḥ |yo asau rāma prayuktena śareṇa vinipātitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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