वाल्मीकि रामायण 4.19.8
वानरा राज सिंहस्य यस्य यूयम् पुरः सराः ।तम् विहाय सुवित्रस्ताः कस्माद् द्रवत दुर्गताः॥
vānarā rāja siṃhasya yasya yūyam puraḥ sarāḥ |tam vihāya suvitrastāḥ kasmād dravata durgatāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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