वाल्मीकि रामायण 4.2.7
ततः सुग्रीव सचिवा दृष्ट्वा परम धन्विनौ ।जग्मुः गिरि तटात् तस्माद् अन्यत् शिखरम् उत्तमम्॥
tataḥ sugrīva sacivā dṛṣṭvā parama dhanvinau |jagmuḥ giri taṭāt tasmād anyat śikharam uttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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