वाल्मीकि रामायण 4.20.20
रामेण हि महत् कर्म कृतम् त्वाम् अभिनिघ्नता ।आनृण्यम् तु गतम् तस्य सुग्रीवस्य प्रतिश्रवे॥
rāmeṇa hi mahat karma kṛtam tvām abhinighnatā |ānṛṇyam tu gatam tasya sugrīvasya pratiśrave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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