वाल्मीकि रामायण 4.20.24
किम् अंगदम् स अंगद वीर बाहोविहाय यातो असि अद्य चिरम् प्रवासम् ।न युक्तम् एवम् गुण संनिकृष्टम्विहाय पुत्रम् प्रिय पुत्रम् प्रिय चारु वेषम्॥
kim aṃgadam sa aṃgada vīra bāhovihāya yāto asi adya ciram pravāsam |na yuktam evam guṇa saṃnikṛṣṭamvihāya putram priya putram priya cāru veṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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