वाल्मीकि रामायण 4.20.4
रणे दारुण विक्रान्त प्रवीर प्लवताम् वर ।किम् इदीनाम् पुरो भागाम् अद्य त्वम् न अभिभाषसे॥
raṇe dāruṇa vikrānta pravīra plavatām vara |kim idīnām puro bhāgām adya tvam na abhibhāṣase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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