वाल्मीकि रामायण 4.20.7
व्यक्तम् अद्य त्वया वीर धर्मतः संप्रवर्तता ।किष्किंधा इव पुरी रम्या स्वर्ग मार्गे विनिर्मिता॥
vyaktam adya tvayā vīra dharmataḥ saṃpravartatā |kiṣkiṃdhā iva purī ramyā svarga mārge vinirmitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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