वाल्मीकि रामायण 4.22.3
सुग्रीव दोषेण न माम् गन्तुम् अर्हसि किल्बिषात् ।कृष्यमाणम् भविष्येण बुद्धि मोहेन माम् बलात्॥
sugrīva doṣeṇa na mām gantum arhasi kilbiṣāt |kṛṣyamāṇam bhaviṣyeṇa buddhi mohena mām balāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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