वाल्मीकि रामायण 4.23.15
परिरब्धुम् न शक्नोमि भुजाभ्याम् प्लवगर्षभ ।कृत कृत्यो अद्य सुग्रीवो वैरे अस्मिन् अतिदारुणे॥
parirabdhum na śaknomi bhujābhyām plavagarṣabha |kṛta kṛtyo adya sugrīvo vaire asmin atidāruṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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