वाल्मीकि रामायण 4.23.17
वार्यामि त्वाम् निरीक्षन्ती त्वयि पंचत्वम् आगते ।उद्बबर्ह शरम् नीलः तस्य गात्र गतम् तदा॥
vāryāmi tvām nirīkṣantī tvayi paṃcatvam āgate |udbabarha śaram nīlaḥ tasya gātra gatam tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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