वाल्मीकि रामायण 4.24.4
यथा प्रतिज्ञातम् इदम् नरेन्द्र कृतम् त्वया दृउष्ट फलम् च कर्म ।मम अद्य भोगेषु नरेन्द्र सूनो मनो निवृत्तम् हत जिवितेन॥
yathā pratijñātam idam narendra kṛtam tvayā dṛuṣṭa phalam ca karma |mama adya bhogeṣu narendra sūno mano nivṛttam hata jivitena ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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