वाल्मीकि रामायण 4.25.3
लोक वृत्तम् अनुष्ठेयम् कृतम् वो बाष्प मोक्षणम् ।न कालाद् उत्तरम् किंचित् कर्म शक्यम् उपासितुम्॥
loka vṛttam anuṣṭheyam kṛtam vo bāṣpa mokṣaṇam |na kālād uttaram kiṃcit karma śakyam upāsitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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