वाल्मीकि रामायण 4.25.43
एष त्वाम् राम रूपेण कालः कर्षति वानर ।येन स्म विधवाः सर्वाः कृता एक इषुणा रणे॥
eṣa tvām rāma rūpeṇa kālaḥ karṣati vānara |yena sma vidhavāḥ sarvāḥ kṛtā eka iṣuṇā raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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