वाल्मीकि रामायण 4.25.48
एवम् विलपतीम् ताराम् पति शोक परीवृताम् ।उत्थापयन्ति स्म तदा वानर्यः शोक कर्शिताः॥
evam vilapatīm tārām pati śoka parīvṛtām |utthāpayanti sma tadā vānaryaḥ śoka karśitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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