वाल्मीकि रामायण 4.27.21
पुलिनैः अति रम्यैः च हंस सारस सेविता ।प्रहसंती इव भाति एषा नारी रत्न विभूषिता॥
pulinaiḥ ati ramyaiḥ ca haṃsa sārasa sevitā |prahasaṃtī iva bhāti eṣā nārī ratna vibhūṣitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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