वाल्मीकि रामायण 4.27.7
अस्याम् वस्त्याम सौमित्रे वर्ष रात्रम् अरिंदम ।गिरि शृंगम् इदम् रम्यम् उत्तमम् पार्थिवात्मज॥
asyām vastyāma saumitre varṣa rātram ariṃdama |giri śṛṃgam idam ramyam uttamam pārthivātmaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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