वाल्मीकि रामायण 4.3.35
एवम् गुण गणैर् युक्ता यस्य स्युः कार्य साधकाः ।तस्य सिद्ध्यन्ति सर्वेऽर्था दूत वाक्य प्रचोदिताः॥
evam guṇa gaṇair yuktā yasya syuḥ kārya sādhakāḥ |tasya siddhyanti sarve'rthā dūta vākya pracoditāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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