वाल्मीकि रामायण 4.31.16
ताम् अपश्यत् बल आकीर्णाम् हरिराज महापुरीम् ।दुर्गाम् इक्ष्वाकु शार्दूलः किष्किंधाम् गिरि संकटे॥
tām apaśyat bala ākīrṇām harirāja mahāpurīm |durgām ikṣvāku śārdūlaḥ kiṣkiṃdhām giri saṃkaṭe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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