वाल्मीकि रामायण 4.31.21
ततः सुग्रीव भवनम् प्रविश्य हरिपुंगवाः ।क्रोधम् आगमनम् चैव लक्ष्मणस्य न्यवेदयन्॥
tataḥ sugrīva bhavanam praviśya haripuṃgavāḥ |krodham āgamanam caiva lakṣmaṇasya nyavedayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें