वाल्मीकि रामायण 4.31.50
तस्य मूर्ध्ना प्रणम्य त्वम् स पुत्र सह बान्धवः ।गच्छ शीघ्रम् महाराज रोषो हि अद्य उपशम्यताम्॥
tasya mūrdhnā praṇamya tvam sa putra saha bāndhavaḥ |gaccha śīghram mahārāja roṣo hi adya upaśamyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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