वाल्मीकि रामायण 4.35.20
ताम् च प्रतीक्षमाणो अयम् विक्रांतान् सुमहा बलान् ।राघवस्य अर्थ सिद्धि अर्थम् न निर्याति हरि ईश्वरः॥
tām ca pratīkṣamāṇo ayam vikrāṃtān sumahā balān |rāghavasya artha siddhi artham na niryāti hari īśvaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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