वाल्मीकि रामायण 4.35.21
कृता सुसंस्था सौमित्रे सुग्रीवेण यथा पुरा ।अद्य तैः वानरैः सर्वैः आगंतव्यम् महाबलैः॥
kṛtā susaṃsthā saumitre sugrīveṇa yathā purā |adya taiḥ vānaraiḥ sarvaiḥ āgaṃtavyam mahābalaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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