वाल्मीकि रामायण 4.36.10
अनुयात्राम् नर इन्द्रस्य करिष्ये अहम् नरषभ ।गच्छतो रावणम् हन्तुम् वैरिणम् स पुरःसरम्॥
anuyātrām nara indrasya kariṣye aham naraṣabha |gacchato rāvaṇam hantum vairiṇam sa puraḥsaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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