वाल्मीकि रामायण 4.36.13
सर्वथा हि मम भ्राता स नाथो वानरेश्वर ।त्वया नाथेन सुग्रीव प्रश्रितेन विशेषतः॥
sarvathā hi mama bhrātā sa nātho vānareśvara |tvayā nāthena sugrīva praśritena viśeṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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