वाल्मीकि रामायण 4.36.19
किम् तु शीघ्रम् इतो वीर निष्क्राम त्वम् मया सह ।सान्त्वयस्व वयस्यम् च भार्या हरण दुःखितम्॥
kim tu śīghram ito vīra niṣkrāma tvam mayā saha |sāntvayasva vayasyam ca bhāryā haraṇa duḥkhitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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