वाल्मीकि रामायण 4.39.11
निमेष अंतर मात्रेण ततः तैः हरि यूथपैः ।कोटी शत परीवारैः कामरूपिभिः आवृता॥
nimeṣa aṃtara mātreṇa tataḥ taiḥ hari yūthapaiḥ |koṭī śata parīvāraiḥ kāmarūpibhiḥ āvṛtā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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