वाल्मीकि रामायण 4.39.18
अनीकैः बहु साहस्रैः वानराणाम् समन्वितः ।पिता हनुमतः श्रीमान् केसरी प्रत्यदृश्यत॥
anīkaiḥ bahu sāhasraiḥ vānarāṇām samanvitaḥ |pitā hanumataḥ śrīmān kesarī pratyadṛśyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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