वाल्मीकि रामायण 4.39.1
इति ब्रुवाणम् सुग्रीवम् रामो धर्मभृताम् वरः ।बाहुभ्याम् संपरिष्वज्य प्रत्युवाच कृतांजलिम्॥
iti bruvāṇam sugrīvam rāmo dharmabhṛtām varaḥ |bāhubhyām saṃpariṣvajya pratyuvāca kṛtāṃjalim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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