वाल्मीकि रामायण 4.39.22
नील अंजन चय आकारो नीलो नाम अथ यूथपः ।अदृश्यत महाकायः कोटिभिः दशभिः वृतः॥
nīla aṃjana caya ākāro nīlo nāma atha yūthapaḥ |adṛśyata mahākāyaḥ koṭibhiḥ daśabhiḥ vṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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