वाल्मीकि रामायण 4.39.29
ततः कोटि सहस्राणाम् सहस्रेण शतेन च ।पृष्ठतो अनुगतः प्राप्तो हरिभिः गंधमादनः॥
tataḥ koṭi sahasrāṇām sahasreṇa śatena ca |pṛṣṭhato anugataḥ prāpto haribhiḥ gaṃdhamādanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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