वाल्मीकि रामायण 4.42.12
कपयो विहरिष्यन्ति नारिकेल वनेषु च ।तत्र सीताम् च मार्गध्वम् निलयम् रावणस्य च॥
kapayo vihariṣyanti nārikela vaneṣu ca |tatra sītām ca mārgadhvam nilayam rāvaṇasya ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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