वाल्मीकि रामायण 4.42.20
दुर्दर्शाम् पारियात्रस्य गता द्रक्ष्यथ वानराः ।कोट्यः तत्र चतुर्विम्शत् गंधर्वाणाम् तरस्विनाम्॥
durdarśām pāriyātrasya gatā drakṣyatha vānarāḥ |koṭyaḥ tatra caturvimśat gaṃdharvāṇām tarasvinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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