वाल्मीकि रामायण 4.42.26
श्रीमान् समुदितः तत्र योजनानाम् शतम् समम् ।गुहाः तत्र विचेतव्याः प्रयत्नेन प्लवंगमाः॥
śrīmān samuditaḥ tatra yojanānām śatam samam |guhāḥ tatra vicetavyāḥ prayatnena plavaṃgamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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