वाल्मीकि रामायण 4.43.12
कांबोज यवनान् चैव शकान् पत्तनानि च ।अन्वीक्ष्य दरदान् चैव हिमवन्तम् विचिन्वथ॥
kāṃboja yavanān caiva śakān pattanāni ca |anvīkṣya daradān caiva himavantam vicinvatha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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