वाल्मीकि रामायण 4.43.25
क्रौन्चम् तु गिरिम् आसाद्य बिलम् तस्य सुदुर्गमम् ।अप्रमत्तैः प्रवेष्टव्यम् दुष्प्रवेशम् हि तत् स्मृतम्॥
krauncam tu girim āsādya bilam tasya sudurgamam |apramattaiḥ praveṣṭavyam duṣpraveśam hi tat smṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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