वाल्मीकि रामायण 4.43.2
उवाच राजा सर्वज्ञः सर्व वानर सत्तम ।वाक्यम् आत्म हितम् चैव रामस्य च हितम् तदा॥
uvāca rājā sarvajñaḥ sarva vānara sattama |vākyam ātma hitam caiva rāmasya ca hitam tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें