वाल्मीकि रामायण 4.43.33
प्रष्टव्याः च अपि सीतायाः प्रवृत्तिम् विनय अन्वितैः ।हेम पुष्कर संछन्नम् तत्र वैखानसम् सरः॥
praṣṭavyāḥ ca api sītāyāḥ pravṛttim vinaya anvitaiḥ |hema puṣkara saṃchannam tatra vaikhānasam saraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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