वाल्मीकि रामायण 4.43.41
महाअर्ह मणि पत्रैः च कांचन प्रभ केसरैः ।नीलोत्पल वनैः चित्रैः स देशः सर्वतो वृतः॥
mahāarha maṇi patraiḥ ca kāṃcana prabha kesaraiḥ |nīlotpala vanaiḥ citraiḥ sa deśaḥ sarvato vṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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